2025 किसानों को समर्थन मूल्य पर उनके वास्तविक धान विक्रय करने में कोई परेशानी न हो – कलेक्टर

छत्तीसगढ़ सहित देश के कई राज्यों में धान खरीदी किसानों की आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। हर वर्ष खरीफ सीजन के बाद जब समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीदी शुरू होती है, तब प्रशासन की भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। हाल ही में जिला प्रशासन द्वारा यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि “किसानों को समर्थन मूल्य पर उनके वास्तविक धान विक्रय करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए”। यह वक्तव्य केवल एक औपचारिक बयान नहीं, बल्कि किसानों के हितों की रक्षा, पारदर्शिता और सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित करने की प्रशासनिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
रायगढ़ जिले में समर्थन मूल्य पर किसानों से धान खरीदी की प्रक्रिया को पूरी तरह सुचारू, पारदर्शी एवं किसान हितैषी बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी द्वारा सतत निगरानी की जा रही है। किसानों को उनके वास्तविक धान विक्रय में किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए कलेक्टर ने रकबा समर्पण, धान उठाव तथा भौतिक सत्यापन की प्रगति पर विशेष जोर देते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नोडल अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली।
कलेक्टर स्वयं प्रतिदिन धान खरीदी योजना की मॉनिटरिंग कर रहे हैं तथा प्रत्येक शाम समीक्षा बैठक आयोजित कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। कलेक्टर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिले के 105 धान उपार्जन केंद्रों के नोडल अधिकारियों की विस्तृत समीक्षा बैठक ली। बैठक में अपर कलेक्टर एवं जिला धान खरीदी के नोडल अधिकारी श्री अपूर्व प्रियेश टोप्पो, सभी अनुविभागीय अधिकारी, खाद्य अधिकारी, जिला विपणन अधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक के दौरान कलेक्टर श्री चतुर्वेदी ने बिंदुवार अब तक की धान खरीदी की प्रगति, धान के उठाव की स्थिति, बारदाना की उपलब्धता, किसानों को ऑनलाइन टोकन सुविधा, पोर्टल में प्रविष्टि, रकबा समर्पण, भौतिक सत्यापन तथा धान के अवैध भंडारण एवं परिवहन पर की जा रही कार्रवाई की विस्तार से समीक्षा की। कलेक्टर ने कहा कि जिन उपार्जन केंद्रों की बफर लिमिट पूर्ण हो चुकी है, वहां धान के उठाव की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। इसके लिए अधिक से अधिक डिलीवरी ऑर्डर जारी कर समयबद्ध उठाव सुनिश्चित किया जाए, ताकि उपार्जन केंद्रों में खरीदी प्रभावित न हो।
समर्थन मूल्य (MSP) क्या है और इसका महत्व
समर्थन मूल्य वह न्यूनतम मूल्य है जिस पर सरकार किसानों से उनकी उपज खरीदने की गारंटी देती है। धान के मामले में MSP का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में कीमत गिरने की स्थिति में भी किसान को उसकी फसल का उचित दाम मिले।

MSP के मुख्य लाभ—
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किसानों को आर्थिक सुरक्षा
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फसल उत्पादन के लिए प्रोत्साहन
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बिचौलियों पर निर्भरता में कमी
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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए भंडारण सुनिश्चित
धान खरीदी व्यवस्था: एक संक्षिप्त परिचय
धान खरीदी आमतौर पर सहकारी समितियों, उपार्जन केंद्रों और नागरिक आपूर्ति निगम के माध्यम से की जाती है। इस प्रक्रिया में—
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किसान का पंजीयन
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टोकन जारी होना
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निर्धारित तिथि पर उपार्जन केंद्र पहुंचना
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तौल, गुणवत्ता जांच
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भुगतान सीधे बैंक खाते में
यह पूरी व्यवस्था तभी सफल होती है जब हर चरण में पारदर्शिता और समयबद्धता बनी रहे।
रकबा समर्पण एवं भौतिक सत्यापन में लाएं तेजी
कलेक्टर ने तहसीलवार रकबा समर्पण की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि जिन किसानों ने अपना धान विक्रय कर लिया है, उनका रकबा समर्पण अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। साथ ही भौतिक सत्यापन की कार्यवाही में भी तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस कार्य में कृषि विभाग के अमले का प्रभावी उपयोग किया जाए। कलेक्टर ने सभी नोडल अधिकारियों से कहा कि वे अपने-अपने उपार्जन केंद्रों का नियमित रूप से निरीक्षण करें तथा धान खरीदी की वास्तविक स्थिति की सतत निगरानी रखें। किसी भी प्रकार की समस्या या अव्यवस्था की स्थिति में तत्काल जिला प्रशासन को अवगत कराएं, ताकि समय रहते समाधान किया जा सके।
कलेक्टर का स्पष्ट संदेश और प्रशासनिक मंशा
जिले के कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को समर्थन मूल्य पर उनका वास्तविक धान बेचने में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए। इसका आशय यह है कि—
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किसानों को कम तौल या गुणवत्ता के नाम पर अनावश्यक कटौती का सामना न करना पड़े
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टोकन, तौल और भुगतान में देरी न हो
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किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या मनमानी बर्दाश्त न की जाए
कलेक्टर के निर्देश प्रशासनिक मशीनरी को यह संदेश देते हैं कि किसान सर्वोपरि हैं और व्यवस्था का उद्देश्य उनकी सुविधा है, न कि उन्हें परेशान करना।

अवैध भंडारण एवं परिवहन पर सख्ती
बैठक में कलेक्टर ने धान के अवैध भंडारण एवं परिवहन पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन की गाइडलाइन के अनुसार धान खरीदी प्रक्रिया का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही, अनियमितता या उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वास्तविक किसानों को धान बेचने में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
टोकन प्राप्त करने से लेकर धान तौल एवं भुगतान प्रक्रिया तक किसानों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। कलेक्टर ने कहा कि धान खरीदी शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसमें सभी अधिकारी पूरी निष्ठा, पारदर्शिता एवं जिम्मेदारी के साथ कार्य करें, ताकि वास्तविक किसानों को समय पर लाभ मिल सके और खरीदी व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो।
उल्लेखनीय है कि 16 दिसंबर 2025 तक जिले में 19 हजार 578 किसानों से अब तक कुल 1091317.20 क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है। इसके एवज में किसानों को 25853.30 लाख रुपये की भुगतान राशि जारी की गई है। वहीं धान के अवैध भंडारण एवं परिवहन के मामले में अब तक 126 प्रकरण दर्ज करते हुए 28,887 क्विंटल से अधिक धान जब्त किया गया है, जिससे अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है। जिले में अब तक 9,100 कृषकों द्वारा कुल 859.37 हेक्टेयर रकबा समर्पण किया गया है।
किसानों को होने वाली प्रमुख समस्याएँ
धान खरीदी के दौरान किसानों को कई बार इन समस्याओं का सामना करना पड़ता है—
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टोकन में देरी या तारीख बदलना
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केंद्रों पर भीड़ और अव्यवस्था
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तौल में हेरफेर की शिकायतें
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गुणवत्ता जांच में अनावश्यक आपत्तियाँ
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भुगतान में विलंब
इन समस्याओं का समाधान तभी संभव है जब प्रशासन सतर्क रहे और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।
कलेक्टर के निर्देश: क्या-क्या सुनिश्चित किया गया
कलेक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों में मुख्य रूप से निम्न बिंदु शामिल हैं—
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सभी उपार्जन केंद्रों पर पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों
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तौल मशीनें कैलिब्रेटेड और सही हों
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गुणवत्ता मानकों का समान रूप से पालन
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किसानों की शिकायतों के लिए त्वरित समाधान तंत्र
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भुगतान प्रक्रिया समयसीमा के भीतर पूरी हो
इन निर्देशों का उद्देश्य केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सुधार लाना है।
प्रशासनिक निगरानी और पारदर्शिता
धान खरीदी को पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन द्वारा—
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निरीक्षण दल गठित किए जाते हैं
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आकस्मिक औचक निरीक्षण
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डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन मॉनिटरिंग
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शिकायतों के लिए हेल्पलाइन/शिकायत पेटी
यह सब इसलिए ताकि किसी भी अनियमितता को समय रहते रोका जा सके।
किसानों की भूमिका और जागरूकता
केवल प्रशासन ही नहीं, किसानों की जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है। किसानों को चाहिए कि—
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पंजीयन और दस्तावेज़ सही समय पर पूरे करें
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तौल और गुणवत्ता जांच के समय स्वयं उपस्थित रहें
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किसी भी अनियमितता पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं
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अफवाहों से बचें और आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें
सहकारी समितियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी
उपार्जन केंद्रों पर कार्यरत कर्मचारी और सहकारी समितियाँ इस व्यवस्था की रीढ़ हैं। उनसे अपेक्षा की जाती है कि—
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किसानों के साथ सम्मानजनक व्यवहार
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नियमों का निष्पक्ष पालन
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किसी भी प्रकार की अवैध वसूली से दूरी
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समय पर रिपोर्टिंग और समन्वय
कलेक्टर के निर्देशों के बाद इनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।The Times of India
भुगतान प्रक्रिया और बैंकिंग व्यवस्था
धान विक्रय के बाद भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में किया जाता है। यह प्रक्रिया—
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पारदर्शी
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डिजिटल
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बिचौलियों से मुक्त
हालांकि, बैंक खाते में त्रुटि या तकनीकी कारणों से कभी-कभी विलंब हो सकता है, जिसे प्रशासन त्वरित समन्वय से हल करने का प्रयास करता है।
दीर्घकालिक लाभ और ग्रामीण अर्थव्यवस्था
जब किसानों को बिना परेशानी समर्थन मूल्य पर धान बेचने का अवसर मिलता है, तो—
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ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्थिरता आती है
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किसान अगली फसल के लिए निवेश कर पाते हैं
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स्थानीय बाजारों में क्रय शक्ति बढ़ती है
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राज्य और देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होती है
“किसानों को समर्थन मूल्य पर उनके वास्तविक धान विक्रय करने में कोई परेशानी न हो”—यह कथन केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि किसान हितैषी शासन की सोच को दर्शाता है। कलेक्टर के स्पष्ट निर्देश, प्रशासनिक निगरानी, और किसानों की जागरूकता—इन तीनों के समन्वय से ही धान खरीदी व्यवस्था सफल हो सकती है।
यदि यह व्यवस्था सही ढंग से लागू होती है, तो न केवल किसानों को उनका हक मिलेगा, बल्कि ग्रामीण विकास, आर्थिक मजबूती और सामाजिक संतुलन भी सुनिश्चित होगा। यही इस पूरी पहल का मूल उद्देश्य है—किसान खुशहाल, व्यवस्था मजबूत और भविष्य सुरक्षित।
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